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Listen to song penned by Deepak Dengle, sung by Sagar Gorkhe -झोपड़ पट्टी रे

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Kabir Kala Manch Members, have been born and bought up in slums, and this song reverberates their experience and understanding on the issue of  labour, poverty and politics.

Poet- Deepak Dengle

Singer- Sagar Gorkhe

झोपड़ पट्टी रे -२
हे अँगरेज़ आया मशीन लाया
मिल बनाया –झोपड़ पट्टी
चमार, गुनकर ,लोहार ,मेह्कार
सब समाया — झोपड़  पट्टी

सारी  दुनिया को ऊंचा उठा के
मजदूर रह लिया —झोपड़  पट्टी

झोपड़ पट्टी रे -२
बाम्बू , चटाई ,पत्र ,लकड़ी ,ऊपर प्लास्टिक
बन गयी झोपड़ी
रेलवे लाइन , बाजू  में वाइन
कैसे भी तो ढक गयी खोपड़ी
अपनी भाषा , कल्चर बनईके
बढ़ती  चल रही ,– झोपड़  पट्टी
झोपड़ पट्टी रे -२

सब है  दादा , सब है  भाई
लफड़ा, झगडा , यह मार कुटाई
दारू, गांजा , पनी मास्टर
भूखे बच्चे , रोती लुघाई
घर घर मान्य देसी शहर में
डूबती चल रही झोपड़ पट्टी

कामगार और किसानों के दम पर
आज़ादी के उड़े कबूतर
वोह राजा  के आया  काला
टूटा वोह सपनों का मंज़र
पांच  सालों में चुना लगा गए
देखती रह गयी झोपड़ पट्टी

झोपड़ पट्टी रे -२

LISTEN BELOW THE THUNDERING SONG

Kabir Kala Manch members sing a slum dweller song

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Lokshahir Sambhaji speaks on Kabir Kala Manch

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Sambhaji Bhagat  who taught the Kabir Kala Manch members in Pune, talks about his personal relationship with the members of Kabir Kala Manch and recites one of the poems of Deepak, who has been in jail for a year now